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कोई न  यहाँ अपना

Date Written: October 13, 2017
Categories:
 

बड़ा मुश्किल है इस दिल को समझाना

कोई न  यहाँ अपना हर कोई है बेगाना 

कोई न किसी को  देख के  खुश होता

हर किसी की ज़िंदगी का  अलग फ़साना है

बड़ा मुश्किल इस दिल को समझाना है

कोई न यहाँ अपना हर कोई बेगाना है।

हर कोई यहाँ झूठ का सहारा लेता है

प्यार के बदले नफरत ही क्यों देता है

कामयाबी की सीढ़ी से दूसरे को चाहता गिराना है

कोई न यहाँ अपना हर कोई है बेगाना

बड़ा मुश्किल है  इस दिल को समझाना ।

माँ बाप का प्यार ही होता यहाँ सच्चा

भाई बहन से कोई न होता अच्छा

ज़िन्दगी की सचाई ही मकसद मेरा बताना है

बड़ा मुश्किल  है इस दिल को समझाना

कोई न यहाँ अपना हर कोई है   बेगाना ।

ऐ मुसाफिर तू चल और चल चलता ही जा

तुझे बस चलते ही जाना है

लाख मुश्किलें करके पार

 मंज़िल को अपनी पाना है

तोड़ के हर दीवार को मन के डर को भगाना है

बड़ा मुश्किल है इस दिल को समझाना 

कोई न यहाँ अपना हर कोई है बेगाना । 

2 comments on “कोई न  यहाँ अपना”

  1. Uma Natarajan     October 13, 2017

    Begane ko apna Bana Kar to dekho

  2. Amandeep     October 13, 2017

    bht koshish ki mam ,pr kuch logon ko apnapan acha nhi lgta

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