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क्यों तू लोगों से इतना जलता है

Date Written: October 6, 2017
Categories:
 

ऐ बंदे क्यों तू लोगों से इतना जलता है ,

देख कर कामयाबी गैरों की क्यों तू हाथ मलता  है ,

है तुझमे भी  हुनर कोई तो कुछ कर के दिखा

कोशिश करने वाले को कभी न कभी फल जरूर मिलता है,

ऐ बंदे  क्यों तू लोगों से इतना जलता है,

देख कर कामयाबी गैरों की क्यों तू हाथ मलता है  . . . . .

 

देखा होगा तूने परिंदों को मेहनत से घोंसला  बनाते,

एक एक तिनके की लिए कैसे हैं सर झुकाते ,

फिर क्यों तू भूल जाता है खुदा को सदा

तू सर झुका के देख हर बार नया रास्ता खुलता है ,

ऐ बन्दे क्यों तू लोगों से इतना जलता है,

देख कर कामयाबी किसी की क्यों तू हाथ मलता है . . . . . ..

 

 

2 comments on “क्यों तू लोगों से इतना जलता है”

  1. Subhashchandra B Adhav     October 6, 2017

    Nice poem Amandeep—–Jealous mindset straightaway exposed—Kudos!!!

  2. Amandeep     October 7, 2017

    right sir .thnku for the amazing comment

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