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नकाब

Date Written: October 5, 2017
Categories:
 

ज़िन्दगी कुछ इस कदर सता  रही है ,

एक एक करके नकाब चेहरों से हटा रही है ,

लोग ज़िन्दगी में आते हैं जाते हैं 

खुद के दम पर जीना यह सीखा रही है। 

 

कभी दर्द बोल के बताया नहीं जाता ,

नकाब ख़ुशी का चेहरे से हटाया नहीं जाता,

टूट चुके होते हैं कुछ लोग भीतर  से 

बार बार मिले धोखे को भुलाया नहीं जाता। 

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