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हमारी दोस्ती

Date Written: October 4, 2017
Categories:
 

तेरी मेरी दोस्ती सदियों पुरानी है ,

एक पल रहूं बिना  तेरे इस बात की होती हैरानी है,

सोचु जब भी बिना तेरे रहने  का ,

न जाने क्यों आ जाता आँख में पानी है।

 

रहते हैं साथ साथ थम के हाथ ,

हर ख़ुशी गम में करते हैं बात ,

खुशियां और गम तो आते जाते हैं ,

नहीं छोड़ेंगे साथ चाहे जो भी हो हालात।

 

लोग कहते हैं पक्का अपना याराना है ,

दोस्ती कैसे होती है यही सबको बताना  है ,

कोई भी मुश्किल आए सामने हमारे ,

हर हाल में साथ एक दूसरे निभाना है।

 

कुछ लोग दोस्ती से हमारी जलते हैं ,

हम वो नहीं जो रोज दोस्त बदलते हैं ,

कैसे समझेंगे वो लोग हमारी दोस्ती को ,

हमारे तो सांस  भी एक दूसरे क लिए चलते हैं।

 

खुदा हमारी दोस्ती को ऐसे बनाये रखे ,

प्यार से सदा आँगन महकाये रखे ,

रूठना मानना सदा लगा रहे ,

नज़रो से दोस्ती को हमारी बचाई रखे।

 

4 comments on “हमारी दोस्ती”

  1. Subhashchandra B Adhav     October 4, 2017

    Salient features of friendship nicely put across—–A well composed poem with appropriate words leaving precise impact on readers—-Fantastic poem—Commendable share !!!

  2. Amandeep     October 4, 2017

    Thanku sir ,m so glad to see ur complement ,u r the first person who commenting and appreciating my words ..
    Plz sir give feedback on my poems ….

  3. Sonia Crt     October 5, 2017

    beautiful.. and thank you so much

  4. Amandeep     October 16, 2017

    thanx to u sonia for being part of my life.

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