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देश मेरा दौड़ रहा है

Date Written: October 13, 2017
Categories:
 

देश मेरा दौड़ रहा है

देश मेरा दौड़ रहा है , अँधेरी गलियों से होता हुआ .. सूरज की सुनहरी किरणों की और…

लेकिन न जाने क्यों उजाला देखते ही, वो फिर लौट पड़ता है अँधेरे की कोठरी में…

भूल भुलाके इंसान अपनी इंसानियतकर रहा है अत्याचार

कही नारी का तो कही समाज की सोच का हो रहा है बलात्कार

सबके आगे आम इंसान है बस लाचार बस लाचार

कुएं में डूबा वो मेंढक है आम इंसानजिसकी सोच बढ़ नहीं पाती..

सरकारी नीतियाँ और देशो की जंगसपनो के पंख लगने से पहले हे है दबा देती..

उड़ना चाहकर भी वो उड़ नहीं पाताजबसे परिंदो ने चलना शुरू कर दिया

अपनी ताकत को जब आम इंसान ने भुला कर खुद ही अपने आप को दीवार के पीछे खड़ा कर दिया

डरा हुआ हैसहमा हुआ हैबस घर में बैठ के देख रहा है..

दम नहीं है उसमे बाहर आने कामुँह छुपा के बैठा है दुपट्टा ओड अपनी माँ का

बैठे बैठे ना तो कभी हुआ है कुछजो जीना है अपने लिए.. तो बहार निकल और लड़ना सीख

आवाज उठानी भी पड़ेंगी.. लाठी खानी भी पड़ेगी

जहां जरुरत पड़ेगी .. वहां अपनी औकात दिखानी भी पड़ेगी

ना झुकना है ना रुकना है .. जो है गलत वो ना सहना है

चल शुरू कर तू चलना मेरे साथहम सब मिलकर बने एक हाथबस एक हाथ..

ना किसी नेता का ना किसी ज्ञानी काये वक़्त है अपनी खुदकी कहानी बनाने का..

चल शुरू कर तू चलना मेरे साथहम सब मिलकर बने एक हाथबस एक हाथ..

 

One comment on “देश मेरा दौड़ रहा है”

  1. Amandeep     October 13, 2017

    well written

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No image देश मेरा दौड़ रहा है देश मेरा दौड़ रहा हैदेश मेरा दौड़ रहा है ,…
by Ankit Aryan Arora
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