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[ मलिन मुख पर आभा चमकी ]

Date Written: November 11, 2017
Categories:
 

मलिन मुख पर आभा चमकी
किस को खो कर किस को पा कर 
चिर प्राचीन प्रसन्नता दमकी
असमय उस की बाट जोह कर 

खो जाऊँगा उस की गहरायिओं में 
सो जाऊँगा उस की परछायीओं में
बलि  हो जाऊँगा उस की भलायिओं  में
विचलित ना हूँगा मैं टेढ़ी अमराईओं में 

ओ देवी! तेरा मेरा एक पक्ष
तेरा हूँ हर पल मैं तेरे समक्ष
परीक्षा ले  ले चाहे स्वयं यक्ष
तेरे ही होगी मूरत वो मेरे वक्ष

सावन भूला ना था भूलूंगा 
तुझ संग झूला था मैं झूलूँगा
अरमानो के फूलो को संजो कर
बना हार  तेरे  गले पहना दूंगा

तुझे सदैव अपनाया था अपनाऊंगा 
विरह में गीत खुशी का गया था गाऊँगा
मधुर धवनि सुन पपीहे की आऊँगा 
डोली में बिठा तुम्हे ले जाऊँगा

तुम पहले भी शरमाई थी शरमाओगी
झुकी पलकों से पास बिठाइया था बिठाओगी 
प्रथम मिलान पे तुम इठलाई थी इठलाओगी 
मेरे चुम्बन से कतराई थी कतराओगी 

दिन ढलेंगे राते होंगी
निश दिन प्रणय में बाते होंगी
भूली बिसरि यादें होंगी
जवानी बुडापा पाती होगी 

प्रयास करेंगे कहने का बारम्बार
बचपन की मीठी याद जवानी की रात
बुडापे  में कयूं करे रक्त का तीव्र संचार
ऐसे ही जीवन सुबह की हो जाएगी रात 

~~~~जवाहर "उपासक" ~~~ 

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