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है मेरी अभिलाषा

Date Written: September 3, 2017
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छू लूँ गगन बिना लिए पर,

किसी का न हो मुझको डर;

मंजिल छोडू न भी मरकर,

है मेरी अभिलाषा।

 

सामर्थ्य रहे मुझमें इतना,

करूँ मैं सभी का उद्धार;

बनूँ मैं दीन का जीवनाधार,

कुछ न लगे मुझे अपार;

है मेरी अभिलाषा।

 

यदि कहीं हो भ्रष्टाचार,

कर दूँ उसे मैं तार-तार;

न हो जन में वाद-विवाद,

सभी करें शुभ-संवाद;

है मेरी अभिलाषा।

 

साक्षात्कार हो कहीं दहशतगर्दी,

मिटा दूँ उसे मैं बिना कोई वर्दी;

प्रसारित हो एक संदेश,

सभी का हो एक देश,एक वेश;

अब भिन्नता रहे न शेष,

है मेरी अभिलाषा।

             – सचिन अ. पाण्डेय

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