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डर है मुझे

Date Written: September 28, 2017
Categories:
 

मन में सिमटे से हैं कुछ ख्वाब
डर है मुझे कहीं कोई बवाल न लिख दूँ
व्यवहार कुछ बदला हुआ है मेरा
डर है मुझे कहीं कोई बिखरा ख्याल न लिख दूँ
खामोश थी मैं काफी वकत से
डर है कहीं आज किसी पे कोई इल्ज़ाम न लिख दूँ

2 comments on “डर है मुझे”

  1. Amandeep     October 3, 2017

    bht khoob likha……
    dil ki baat vyakt ho rhi hai

  2. Sonia Crt     October 7, 2017

    thank you Aman g

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