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है मेरी अभिलाषा
by Sachin A. Pandey
छू लूँ गगन बिना लिए पर,किसी का न हो मुझको डर;मंजिल छोडू न भी मरकर,है मेरी अभिलाषा। सामर्थ्य रहे मुझमें इतना,करूँ मैं सभी का उद्धार;बनूँ मैं दीन का जीवनाधार,कुछ न लगे मुझे अपार;है मेरी अभिलाषा।  यदि कहीं हो भ्रष्टाचार,कर दूँ उसे मैं तार-तार;न हो जन में वाद-विवाद,सभी करें शुभ-संवाद;है मेरी अभिलाषा। साक्षात्कार हो कहीं दहशतगर्दी,मिटा दूँ उसे…
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