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SHAYARI

सुबह उठके मेरी शायरी पढना तुझे अच्छा लगेगा,
खिलेगा तेरा दिल और दिन अच्छा गुजरेगा ,
निकल आना तू बाहर अपने घर से ,
जब ये आशिक़ तेरी गलियों से गुज़रेगा,
देख लूंगा तुझे मैं जी भरकर,
न जाने फिर ये ईद का चाँद कब निकलेगा,
भर लूंगा तुझे मैं अपनी आँखों में ,
अगर न मिली तू तो यही तेरा दर्द अश्रु बनकर निकलेगा,

महसूस करोगे तुम भी इसी एहसास को ,
जब भी मेरा दिल तेरे लिए सोचेगा,
ढूंढोगे तुम भी कभी हमे जब अकेले में,
तब वो वक़्त भी बहुत कुछ तुमसे पूछेगा,
सुबह उठके मेरी शायरी पढना तुझे अच्छा लगेगा........
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SHAYARI, by Saurabh Singh 5 out of 5 based on 0 ratings. 2 reviews.
ARUN MAZUMDER 7 days ago
good
Saurabh Singh 7 days ago
good
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