We need some more details to complete your registration




Sign in with one easy click

POERTY

"दर्द उठता है तो कागज पर लिख देते है,
शायद इसी को आप एक कविता कहते है,
नजाकत क्या हमारी जो कविता लिख सके,
कवी तो बहुत पहुचे हुए लोग होते है,
हम तो सिर्फ उनके नक़्शे कदम पर चलते है,

कईओं को सुना है कईओं को देखा है,
मगर हर किसी को किसी के गम मे देखा है,
लिखते है वही जिसने प्यार को समझा है,
बाकी को तो किनारे पर आती लहरो मे ही डूबते देखा है,
Report Abuse

  • About my poem
  • Review this poem
POERTY, by Saurabh Singh 5 out of 5 based on 0 ratings. 3 reviews.
Saurabh Singh 11 months ago
gud
ARUN MAZUMDER 11 months ago
good
Subhashchandra Adhav 11 months ago
Nice expression 
Nice poem 
Well done !
Recent Activities
Most Active Members This Week
Poetry Pin Winners - 25,000 Points
Poetry Pin Winners - 100,000 Points
Congratulations!