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POERTY

"दर्द उठता है तो कागज पर लिख देते है,
शायद इसी को आप एक कविता कहते है,
नजाकत क्या हमारी जो कविता लिख सके,
कवी तो बहुत पहुचे हुए लोग होते है,
हम तो सिर्फ उनके नक़्शे कदम पर चलते है,

कईओं को सुना है कईओं को देखा है,
मगर हर किसी को किसी के गम मे देखा है,
लिखते है वही जिसने प्यार को समझा है,
बाकी को तो किनारे पर आती लहरो मे ही डूबते देखा है,
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POERTY, by Saurabh Singh 5 out of 5 based on 0 ratings. 3 reviews.
Saurabh Singh 7 days ago
gud
ARUN MAZUMDER 7 days ago
good
Subhashchandra Adhav 7 days ago
Nice expression 
Nice poem 
Well done !
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