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ek purana kissa

सोचा बहुत आज क्या लिखू तेरे लिए,
मगर समझ कुछ न आया,
आँखे बंद कर के देखा तो मुझे तू नज़र आया,
हाथों मे फूलों की थाली लिए,
तुझे किसी के साथ खड़ा पाया,
खूबसूरत थी बहुत तू बहुत,
तेरी खूबसूरती को देख आँखों ने मेरे दिल को समझाया,
है नासमझ थोड़ा मगर फिर भी मन को भाया,
नृत्य तेरा देख मुझे तू ओर भी पसंद आया,
जगी फिर जो ख्वाइश मेरे दिल मे थी,
उस ख्वाइश को उस वक़्त ने पूरा कराया,
जब भोजन करने का मौका मेरा तेरे साथ आया,
ये था एक किस्सा तुहसे पहली मुलाकात का,
उसी किस्से को मेने तेरे लिए अपने शब्दों से मिलाया,
सोचा बहुत आज क्या लिखू तेरे लिए...................

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ek purana kissa, by Saurabh Singh 5 out of 5 based on 0 ratings. 3 reviews.
ARUN MAZUMDER More than 1 year ago
ok
Saurabh Singh More than 1 year ago
EK yaad purani
Subhashchandra Adhav More than 1 year ago
Well done!-
Keep sharing!
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