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कैसे कहूँ

Date Written: October 5, 2017
Categories:
 

क्या कहूँ कैसे कहूँ कहा कुछ जाता नहीं

डरता है दिल यह नाराज़ न हो जाये कोई कहीं,

भेजा था भगवान ने करने के लिए कुछ ख़ास

कभी तो मौका मिलेगा जी रही हूँ यही ले के आस,

कोई तो मेरा होगा जो मुझे पहचानेगा

समझेगा मेरा हर दुःख मेरा हाथ थामेगा,

कितना दर्द लिए बैठी हूँ बयान किया जाता नहीं

क्या कहूँ कैसे कहूँ कहा कुछ जाता नहीं,

अभी तो मीलों है चलना ले के अपने ये सपने

वक़्त ने अभी दिखा दिए कौन पराये कौन अपने,

कदम कदम पर बैठे हैं मौके का फ़ायदा उठाने वाले

कुछ तो रहम करो भगवान अच्छे हों मेरे पल आने वाले,

दुनिया की इस भीड़ में अकेले रहा जाता नहीं

क्या कहूँ कैसे कहूँ कहा कुछ जाता नहीं,

बेटी थी बेटी हूँ बेटी ही रहूँगी

दुनिया चाहे लाख बुरा कहे माँ बाप को ही अच्छा कहूँगी,

बचपन में ही भगवान ने दे दिए इतने ग़म

कुछ अपने ही थे जिन्होंने होने न दिया काम,

कहते कहते आज अमन ने बहुत कुछ है कह लिया

अभी बहुत है दरद दिल में ,अब आैर सहा जाता नहीं

क्या कहूँ कैसे कहूँ कहा कुछ जाता नहीं।

 

2 comments on “कैसे कहूँ”

  1. Sonia Crt     October 5, 2017

    beautiful Aman.. great job..
    magnificent work dear

  2. Amandeep     October 5, 2017

    thanx sonia crt .

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